जमीन, सरकारी नौकरी और कैश, सरकार की नई नीति में बड़ी घोषणाएं, जानें पीड़ितों को मुआवजे में क्या मिलेगा

Surrender Policy: छत्तीसगढ़ की नई सरेंडर पॉलिसी के तहत अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को बड़ा फायदा दिया जाएगा। इसके साथ ही नक्सली हिंसा में पीड़ित लोगों के लिए सरकार ने जमीन देने का भी प्रावधान किया है। इस नीति के तहत मुखबिर की हत्या होने पर 10 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा।

Mar 23, 2025 - 14:19
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जमीन, सरकारी नौकरी और कैश, सरकार की नई नीति में बड़ी घोषणाएं, जानें पीड़ितों को मुआवजे में क्या मिलेगा
रायपुर: छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन को पूरा करने के लिए सुरक्षाबल के जवान जहां लगातार कार्रवाई कर रहे हैं वहीं, सरकार ने घोषित की है। नई आत्मसमर्पण एवं पीड़ित पुनर्वास नीति के तहत माओवादी हिंसा के शिकार लोगों को भूमि और नक्सल रोधी अभियानों में सुरक्षा बलों की सहायता करते हुए मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत-पुनर्वास नीति 2025 का मकसद नक्सली हिंसा के पीड़ितों को अधिक मुआवजा, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और नौकरी के अवसर प्रदान करना है।इसके साथ ही सरेंडर करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और नया जीवन शुरू करने के लिए कानूनी सहायता भी मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि राज्य में सरेंडर करने वाले अविवाहित या ऐसे नक्सली जिनके पति या पत्नी अब जीवित नहीं है, उन्हें सरेंडर करने के तीन वर्ष के भीतर विवाह के लिए एक लाख रुपए अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। माओवादी हिंसा के पीड़ितों को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि या शहरी क्षेत्रों में आवासीय भूमि देने का भी प्रावधान किया गया है।

मुखबिरों को 10 लाख तक मिलेगी राशि

अधिकारियों ने बताया कि नई नीति का प्राथमिक उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की सहायता करना और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को समाज में फिर से शामिल करना है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार का मानना है कि नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई और पुनर्वास के बीच संतुलन जरूरी है। नई नीति के तहत नक्सल रोधी अभियानों में पुलिस की विशेष सहायता करने वाले मुखबिरों की मृत्यु के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।

किसे मिलेगी जमीन?

अधिकारी ने नई नीति के मसौदे का हवाला देते हुए बताया कि ठीक इसी तरह नक्सली हिंसा में स्थायी विकलांगता के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि नक्सलियों द्वारा हत्या किये जाने, गंभीर चोट पहुंचाने या फिर स्थायी विकलांगता की स्थिति में पीड़ित या उसके परिवार को शहरी क्षेत्रों में 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि या 1,742 वर्ग फुट आवासीय भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारी ने बताया कि अगर भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी तो ग्रामीण क्षेत्रों में पीड़ितों को चार लाख रुपये और शहरी क्षेत्रों में आठ लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।अगर पीड़ित का परिवार घटना के तीन साल के भीतर कृषि भूमि खरीदता है तो उसे अधिकतम दो एकड़ भूमि की खरीद पर स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से पूरी छूट मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि नक्सली हिंसा में जान गंवाने के मामले में अगर परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकी तो 15 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पति, पत्नी और बच्चों को 10 लाख रुपये और माता-पिता को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे।

अन्य राज्य के लोगों को भी मिेलगा लाभ

उन्होंने बताया कि नई नीति में नक्सली हिंसा से पीड़ित लोगों के लिए भी पुनर्वास की व्यवस्था की गई है। अधिकारी ने बताया कि राज्य में घटित नक्सली हिंसा में अगर अन्य राज्य के व्यक्ति या परिवार पीड़ित होते हैं, तो वे भी इस नीति के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे।

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@Dheeraj kashyap युवा पत्रकार- विचार और कार्य से आने वाले समय में अपनी मेहनत के प्रति लगन से समाज को बेहतर बना सकते हैं। जरूरत है कि वे अपनी ऊर्जा, साहस और ईमानदारी से र्काय के प्रति सही दिशा में उपयोग करें , Bachelor of Journalism And Mass Communication - Tilak School of Journalism and Mass Communication CCSU meerut / Master of Journalism and Mass Communication - Uttar Pradesh Rajarshi Tandon Open University पत्रकारिता- प्रेरणा मीडिया संस्थान नोएडा 2018 से केशव संवाद पत्रिका, प्रेरणा मीडिया, प्रेरणा विचार पत्रिका,