वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर उनके जीवन के बारे में
गांधीजी के अहिंसावादी विचारों से सहमत न होकर, अय्यर बल प्रयोग के पक्षधर थे। इंग्लैंड में उनका संपर्क विनायक दामोदर सावरकर से हुआ। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्हें ब्रिटिश सम्राट के प्रति निष्ठा की शपथ लेने का समय आया, तो वे इसके लिए तैयार नहीं हुए और पांडिचेरी चले गए
वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर उनके जीवन के बारे में
वराहनेरी वेंकटेश सुब्रमण्यम अय्यर (जन्म: 2 अप्रैल 1881; मृत्यु: 3 जून 1925) एक स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त थे। वे अंग्रेजी, लैटिन, फ्रेंच, संस्कृत और तमिल भाषाओं के जानकार थे। उनके क्रांतिकारी कार्यों के कारण फ्रांसीसी अधिकारियों ने उन्हें एक बार पांडिचेरी से निकाल कर अलजीयर्स भेज दिया था।
परिचय
वराहनेरी वेंकटेश सुब्रमण्य अय्यर का जन्म 2 अप्रैल 1881 को मद्रास प्रदेश के तिरुचिरापल्ली जिले में हुआ था। शिक्षा पूरी करने के बाद वे वकील बने। अधिक सफलता की तलाश में वे पहले रंगून गए और फिर बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड चले गए। इंग्लैंड में उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई। सुब्रमण्य अय्यर क्रांतिकारी विचारों के व्यक्ति थे और मानते थे कि शस्त्रों के बल पर ही भारत को आजादी मिल सकती है। वे अंग्रेज शासकों की हत्या को स्वतंत्रता संग्राम का एक अंग मानते थे।
क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त भी थे
गांधीजी के अहिंसावादी विचारों से सहमत न होकर, अय्यर बल प्रयोग के पक्षधर थे। इंग्लैंड में उनका संपर्क विनायक दामोदर सावरकर से हुआ। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्हें ब्रिटिश सम्राट के प्रति निष्ठा की शपथ लेने का समय आया, तो वे इसके लिए तैयार नहीं हुए और पांडिचेरी चले गए, जो उस समय फ्रांस के अधिकार में था। 1910 में पांडिचेरी पहुंचकर उन्होंने युवाओं को शस्त्र चलाना सिखाया और देश के अन्य क्रांतिकारियों को हथियार पहुंचाने का काम किया।
जेल की यातना भी सही क्यों की वो क्रांतिकारी थे इस लिए उन पर राजद्रोह लगा
1920 तक पांडिचेरी में रहने के बाद, वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर मद्रास लौट आए। यहां उन पर राजद्रोह का मुकदमा चला और उन्हें सजा हुई। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण फ्रांसीसी अधिकारियों ने उन्हें पांडिचेरी से निकालकर अलजीयर्स भेज दिया।
बहुभाषाविद् थे
सुब्रमण्य अय्यर एक बहुभाषाविद् थे। उन्होंने 'बाल भारती' नामक तमिल पत्रिका का संपादन किया और तमिल भाषा की कई रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया। उनकी लिखी 'नेपोलियन की जीवनी' को भारत सरकार ने जब्त कर लिया था। उनके लेखन पर कंबन की रामायण का भी प्रभाव था।
सुब्रमण्य की मृत्यु
वराहनेरी वेंकटेश सुब्रमण्य अय्यर का 3 जून 1925 को निधन हो गया। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्रांतिकारी थे और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।