चरित्र का शिखर
अगर किसी व्यक्ति को परखना है या उस व्यक्ति के बारे में जानने की जिज्ञासा है... तो आप उस व्यक्ति की नैतिकता, मूल्यों और आदतों को मात्र देखकर पता लगा सकते हैं।
चरित्र व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू होता है... जो कि उस व्यक्ति के विचारों, भावनाओं और व्यवहार को दर्शाता है। कहने का अर्थ है, अगर किसी व्यक्ति को परखना है या उस व्यक्ति के बारे में जानने की जिज्ञासा है... तो आप उस व्यक्ति की नैतिकता, मूल्यों और आदतों को मात्र देखकर पता लगा सकते हैं। क्योंकि यही तीन चीजें व्यक्ति के स्वभाव को प्रतिबिंबित करती है। हमारे बड़ों द्वारा सदा से सीख दी जाती है कि चरित्र के शिखर पर संतानें होनी चाहिए... इसका सीधा सा अर्थ यही है कि आप सही और गलत को समझें... क्योंकि यही मानक आपके निर्णय और कार्य को प्रभावित करते है।
जैसे कि एक कहानी आप सभी ने सुनी होगी... स्वामी विवेकानंद को इटली की एक स्त्री ने कहा था... विवेकानंद, तुम कितने बुद्धिमान हो... मैं कितनी सुंदर हूं... मेरे साथ ब्याह कर लो, मैं तुम्हारे जैसा पुत्र पैदा कर दूंगी। स्वामी विवेकानन्द ने कहा देवी, मेरे जैसा तो मैं ही हो सकता हूं। इसी क्षण आप मेरी मां बन जाओ। मुझे अपना पुत्र स्वीकार कर लो... अपनी इच्छा पुरी करो, उनको सोचना नहीं पड़ा! आदर्श और उसूल जिनके स्पष्ट होते हैं, उनको सोचना नहीं पड़ता... एक क्षण से उनके मन में ये विचार आया।
अभिषेक विद्यार्थी,
पत्रकारिता का छात्र