कानून मंत्री से असहमत विपक्ष ने दोनों विधेयकों का किया विरोध
कानून मंत्री से असहमत विपक्ष ने दोनों विधेयकों का किया विरोध, The opposition disagreed with the Law Minister and opposed both the bills,
कानून मंत्री से असहमत विपक्ष ने दोनों विधेयकों का किया विरोध
वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे 20 भाजपा सांसद, पार्टी कर रही जांच 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़े विधेयकों को पेश करने के लिए मंगलवार को लोकसभा में हुई वोटिंग के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के लगभग 20 सांसद सदन से अनुपस्थित रहे। पार्टी इसकी जांच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि भाजपा ने विधेयकों को पेश करने के दौरान उपस्थित रहने के लिए अपने सांसदों को व्हिप जारी किया था। इसके बावजूद इतने सांसदों की अनुपस्थिति ने नेतृत्व को नाराज कर दिया है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'हम निश्चित रूप से उनकी अनुपस्थिति के कारणों की जांच कर रहे हैं। उनमें से कुछ के ही वास्तविक कारण थे।' सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल समेत कुछ सांसद राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रम में व्यस्त थे। भाजपा के सहयोगी दलों के भी चार-पांच सांसद वोटिंग के दौरान उपस्थित नहीं थे, इसकी भी जांच की जा रही है।
कानून मंत्री से असहमति जताते हुए विपक्षी सदस्यों ने दोनों विधेयकों का विरोध किया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि 'एक देश, एक चुनाव' संविधान की मूल संरचना ही नहीं, संघवाद पर सीधा हमला है। संविधान की कुछ विशेषताएं इस सदन की विधायी क्षमता से परे हैं। राष्ट्रपति तथा चुनाव आयोग को राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव तय करने का अधिकार कतई नहीं दिया जा सकता। मनीष तिवारी ने विधेयक को जेपीसी में भेजने की मांग करते कहा कि 'एक देश, एक चुनाव' का प्रस्ताव देश के संसदीय लोकतंत्र और राज्यों के लिए खतरनाक है और इसीलिए कांग्रेस इसके विरुद्ध है। सदन में डेढ़ घंटे तक चले जोरदार वाद-विवाद और मतविभाजन के बीच तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह विधेयक राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को लोकसभा के कार्यकाल से जोड़कर जनादेश को कमजोर करता है। साथ ही राज्य को केंद्र का अधीनस्थ बनाता है।
बनर्जी ने दावा किया कि यह विधानसभा की स्वायत्तता को छीन लेगा। यह चुनाव सुधार नहीं, बल्कि एक सज्जन की इच्छा और सपने को पूरा करने का प्रयास है। समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा इसे देश में तानाशाही लाने के उपक्रम के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है। द्रमुक के टीआर बालू और एनसीपी-एसपी की सुप्रिया सुले ने भी विधेयक का विरोध किया।
राजग की सबसे बड़ी सहयोगी तेदेपा ने जरूर विधेयक का समर्थन करने की घोषणा कर सरकार को राहत दी।
तेदेपा नेता व केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि 'एक देश, एक चुनाव' से चुनावों पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। शिवसेना ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए विपक्ष के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया। जबकि एआइएमआइएम के असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संविधान के प्रतिकूल बताते हुए कहा कि यह विधेयक क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व मिटा देगा।
विपक्षी दलों की मांग पर लोकसभा में वोटिंग हुई जिसमें 269 सदस्यों ने विधेयक पेश करने के पक्ष में और 198 ने विरोध में मतदान किया। सामान्य बहुमत के इस आंकड़े के साथ कानून मंत्री ने 'एक देश, एक चुनाव' और उससे संबंधित एक अन्य विधेयक पेश कर दिया। इसके बाद गृह मंत्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का समर्थन किया था। इस पर जेपीसी में विस्तृत चर्चा के बाद इसकी रिपोर्ट कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी जाएगी और उसके बाद सदन में दोनों विधेयकों पर चर्चा होगी।