अंतरिक्ष कबाड़ पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी पृथ्वी की निचली कक्षा में बढ़ते मलबे से अंतरिक्ष यातायात जाम होने का खतरा
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अंतरिक्ष कबाड़ पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी पृथ्वी की निचली कक्षा में बढ़ते मलबे से अंतरिक्ष यातायात जाम होने का खतरा
अंतरिक्ष में तेजी से बढ़ते सैटेलाइट्स और अंतरिक्ष कबाड़ के कारण पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट - LEO) में गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह क्षेत्र जाम का सामना कर सकता है, जिससे न केवल वैज्ञानिक और व्यावसायिक गतिविधियां बाधित होंगी, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों में भी समस्याएं आएंगी।
अंतरिक्ष कबाड़ की समस्या
पृथ्वी की निचली कक्षा में इस समय लगभग 14,000 सक्रिय और निष्क्रिय सैटेलाइट मौजूद हैं, जिनमें से 3,500 निष्क्रिय हैं। इनके अलावा, अंतरिक्ष में 12 करोड़ से अधिक मलबे के छोटे-बड़े टुकड़े भी घूम रहे हैं। इनमें से केवल कुछ हजार टुकड़े इतने बड़े हैं कि उन पर नजर रखी जा सके, जबकि अधिकांश बेहद छोटे हैं और अनदेखी की स्थिति में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
स्पेस ट्रैफिक जाम का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हजारों नए सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे। स्लिंगशॉट एयरोस्पेस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में प्रति सैटेलाइट नजदीकी दृष्टिकोण (क्लोज एप्रोच) की घटनाओं में 17% की वृद्धि हुई है। यह इस बात का संकेत है कि कक्षा में वस्तुओं के टकराने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र पैनल की सिफारिशें
संयुक्त राष्ट्र के अंतरिक्ष यातायात समन्वय पैनल ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान आकर्षित करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया है। पैनल का कहना है कि अगर देशों और कंपनियों ने मिलकर काम नहीं किया और अंतरिक्ष प्रबंधन के लिए आवश्यक डेटा साझा नहीं किया, तो स्थिति और खराब हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष मामलों के कार्यालय की निदेशक, आरती होला मैनी, ने कहा कि अब देरी की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेटरों के बीच सूचना साझा करना और सेंट्रलाइज्ड स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करना जरूरी है।
समस्या के समाधान के लिए सुझाव
- सैटेलाइट लॉन्चिंग पर नियंत्रण: विशेषज्ञों का सुझाव है कि सैटेलाइट लॉन्चिंग की संख्या को सीमित किया जाए और जिम्मेदार कंपनियों को इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया जाए।
- अंतरिक्ष कबाड़ की सफाई: कक्षा में जमा मलबे को हटाने के लिए नई तकनीकों का विकास और उपयोग किया जाना चाहिए।
- साझा डेटा प्लेटफॉर्म: विभिन्न देशों और कंपनियों के बीच अंतरिक्ष गतिविधियों के डेटा को साझा करने के लिए एक भरोसेमंद प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाए।
- स्मार्ट सैटेलाइट डिजाइन: नई पीढ़ी के सैटेलाइट को इस तरह से डिजाइन किया जाए कि वे अपने जीवनकाल के बाद स्वचालित रूप से नष्ट हो जाएं।
अंतरिक्ष कबाड़ के खतरे
- वैज्ञानिक अनुसंधानों पर असर: मलबे के कारण अंतरिक्ष यान और सैटेलाइट के टकराने की आशंका बढ़ सकती है, जिससे अनुसंधान और संचार सेवाओं में बाधा आ सकती है।
- लॉन्चिंग में रुकावट: भविष्य में किसी भी नई लॉन्चिंग के लिए सुरक्षित मार्ग खोजना मुश्किल हो सकता है।
- सूर्य की रोशनी पर असर: विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यह समस्या गंभीर हो गई, तो सूरज की रोशनी भी धरती तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगी।
भारत की भूमिका और तैयारी
भारत, जो कि एक उभरती हुई अंतरिक्ष शक्ति है, ने इस समस्या को पहचानते हुए नेट्रा (NETRA) जैसी परियोजनाएं शुरू की हैं। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष मलबे की निगरानी करना और अंतरिक्ष वस्तुओं के ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत बनाना है।
अंतरिक्ष कबाड़ न केवल अंतरिक्ष यातायात के लिए बल्कि वैश्विक संचार, नेविगेशन और वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए भी एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। यह समय की मांग है कि सभी देश मिलकर काम करें और पृथ्वी की निचली कक्षा को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाएं।