118 सदस्यीय विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने महाकुंभ में किया संगम स्नान, भारतीय संस्कृति की सराहना की
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118 सदस्यीय विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने महाकुंभ में किया संगम स्नान, भारतीय संस्कृति की सराहना की
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले में शनिवार को एक विशेष विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इस 118 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में 77 देशों के राजनयिक और मिशन प्रमुख शामिल थे, जो अपने जीवन साथियों के साथ इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बने। इस भव्य आयोजन में शामिल होकर उन्होंने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और धार्मिक परंपराओं की सराहना की।
महाकुंभ में मिला जीवन का अद्भुत अनुभव
प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार का आभार प्रकट किया और इसे एक अद्वितीय अनुभव बताया। कोलंबिया के राजदूत विक्टर चावेरी ने कहा, "यह मेरे जीवन का सबसे अनोखा अनुभव था। महाकुंभ एक ऐसा अवसर है जिसे हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार अनुभव करना चाहिए। यहाँ की आध्यात्मिकता और ऊर्जा को महसूस करना एक अलौकिक अनुभूति है। भारतीय संस्कृति समृद्ध है और इसका संदेश शांति एवं मानवता के लिए है। जब आप संगम पर हजारों श्रद्धालुओं को श्रद्धा में लीन देखते हैं, तो एक अलग ही शक्ति का अहसास होता है।"
रूस के राजदूत की पत्नी डायना ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं भारतीय विदेश मंत्रालय का धन्यवाद करती हूँ, जिन्होंने हमें इस पवित्र आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर दिया। यहाँ संगम स्नान करके मुझे गहरी आत्मिक शांति मिली और मैं भारतीय संस्कृति की गहराई से बहुत प्रभावित हुई हूँ।"
संगम स्नान से मिली आध्यात्मिक ऊर्जा
स्लोवाकिया के राजदूत रॉबर्ट ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा, "यह अनुभव मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा। यहाँ की ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक वातावरण ने मेरे मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी है। महाकुंभ का संदेश शांति और एकता है, जिसे पूरे विश्व में फैलाना चाहिए।"
क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मारजन ने कहा, "यह आयोजन वास्तव में अद्भुत है। लाखों श्रद्धालुओं को एक साथ संगम स्नान करते देखना एक असाधारण अनुभव था। भारतीय संस्कृति बहुत समृद्ध और गहरी है, और यह देखकर गर्व होता है कि भारत इसे संरक्षित कर रहा है।"
इक्वाडोर के राजदूत फर्नांदो ने अपने बचपन के सपने के पूरा होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "जब मैं छोटा था, तब से मेरा सपना था कि मैं एक दिन गंगा के पवित्र जल में स्नान करूँगा। आज वह सपना पूरा हुआ और यह मेरे लिए एक अत्यंत आध्यात्मिक अनुभव था। मैंने भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और ध्यान के बारे में बहुत कुछ सीखा। यहाँ का माहौल बहुत शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक है।"
भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इस आयोजन की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, "विदेश मंत्रालय से हमारा निरंतर संपर्क बना हुआ था और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा था कि कई विदेशी राजनयिक महाकुंभ में आना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी को आमंत्रित किया और आज यहाँ अनेक देशों के राजदूत और हाई कमिश्नर उपस्थित हैं। यह देखकर हर्ष होता है कि वे भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को जानने के लिए उत्सुक हैं।"
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा, "महाकुंभ में अब तक 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम स्नान कर चुके हैं और बड़ी संख्या में लोग अभी भी आ रहे हैं। हमें विश्वास था कि इस बार 45-50 करोड़ लोग स्नान करेंगे और यह आंकड़ा अब साकार होता दिख रहा है। यहाँ आने वाले लोग प्रशासन की व्यवस्था से काफी प्रभावित हैं और विदेशी मेहमान भी इस भव्य आयोजन में सम्मिलित होकर प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं।"
महाकुंभ का पौराणिक महत्व
महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। इस आयोजन का पौराणिक महत्व भी है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश की कुछ बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं, जिसके चलते इन स्थानों पर हर 12 वर्ष में कुंभ मेले का आयोजन होता है। महाकुंभ का आयोजन प्रत्येक 144 वर्षों में होता है, जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं।
विदेशी प्रतिनिधिमंडल को महाकुंभ के इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि यह आयोजन न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक उन्नति और शांति का प्रतीक है।
अद्भुत स्वागत और प्रशासन की व्यवस्था से प्रभावित हुए विदेशी मेहमान
प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। संगम क्षेत्र की स्वच्छता, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विदेशी मेहमानों ने प्रसन्नता जाहिर की। स्लोवाकिया के राजदूत ने कहा, "इतने बड़े स्तर पर आयोजन करना आसान नहीं होता, लेकिन भारत ने इसे बेहतरीन तरीके से किया है। हर चीज सुव्यवस्थित है और प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।"
रूस की डायना ने कहा, "मुझे संगम क्षेत्र की स्वच्छता और पानी की शुद्धता देखकर बहुत अच्छा लगा। भारतीय संस्कृति बेहद समृद्ध है और यहाँ के लोग इसे संरक्षित कर रहे हैं, यह देखना अत्यंत सुखद है।"
भारतीय संस्कृति का संदेश पूरे विश्व तक पहुँचे
महाकुंभ न केवल भारतीयों के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और ज्ञान का केंद्र है। यह आयोजन विश्व को शांति, एकता और मानवता का संदेश देता है।
महाकुंभ के इस विशेष आयोजन में भाग लेकर विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने न केवल भारतीय संस्कृति को करीब से जाना, बल्कि इसे विश्व के अन्य देशों तक पहुँचाने की भी बात कही। क्यूबा के राजदूत ने कहा, "महाकुंभ का संदेश समस्त मानवता के लिए है। हमें इस संस्कृति और परंपरा से बहुत कुछ सीखना चाहिए और इसे अपने देशों तक पहुँचाना चाहिए।"
महाकुंभ 2025 का यह आयोजन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया है। 77 देशों के राजदूतों और उनके परिवारों ने इसमें भाग लेकर न केवल इसकी भव्यता को देखा, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात भी किया। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।